बाबा नीब करौरी पल पल चरण वंदन ....
कुछ नही जानता था बस कही कभी कम्बल ओढ़े बाबा का चित्र देख लेता था ....मैं तो ठहरा निरा गवार मुझे कुछ आता जाता थोड़े , जहां कही ऊंचा स्थान भी दिख जाए बचपन की डेवहार देवी, ग्राम देवता समझ सर झुक जाता है ।
मंदिर तो मेरा ही है पर आप यकीन करें कि इतना मूढ़ और गवाँर हूँ ( आज कल की तरह समझदार थोड़े हूँ ) मस्जिद, गुरुद्वारा और श्रावस्ती के जितने बौद्ध मंदिर है कही कोई जैन मंदिर या फिर कोई चर्च ...सर खुद ही झुक जाता है । कह सकते हो पथभ्रष्ट कंग्रेसी हूँ या 36 करोड़ भी कम पड़ जाते है मुझे, लालची बहुत हूँ ....बचपन मे दादी सामने मरहूम शमशाद चच्चा के यहाँ बाबा (ताजिया) के आने पर लोहबान और बताशा मुझसे ही भेजती थी । कहती थी तुम अपने माँ बाप की शादी के 10 साल बाद पैदा हुए । सरयू में डुबकी मारी और बोली एक नाती दे दो तुम्हारा ही नाम रखूंगी और ताजिया बाबा को उसी साल सिन्नी और लोबान भेजी ....10th में था दादी चली गई अन्यथा आज के माहौल में पुछता जरूर दादी सरयू माँ ने दिया था मुझे कि हसन हुसैन से ....क्यों 1988 में इस प्रश्न का औचित्य ही नही था । प्रासंगिक तो अब हुवा है अटल आडवाणी जी के अथक प्रयास से और मोदी जी के उद्भव से .....
खैर क्या शुरू किया था कहाँ पहुँच गया । इसीलिए बहुत बड़े आदमी और राजनीति के धुरंधर ने अभी पिछले सप्ताह ही मुझे कहाँ "you are unguided missile ..."
बाबा से परिचय मेरे छोटे भाई आशीष शुक्ल "रिशु" ने कराया ...मुझे मथुरा ले गए बाबा के परिनिर्वाण दिवस पर ....सोशल मीडिया पर बाबा कीं खूब तश्वीर आती है । मेरे तुलसीपुर के चाचा श्री सियाराम जी बाबा की आस्था सोशल मीडिया पर प्रकट करते रहते है । जब कोविड हुवा तब मैं, पत्नी, माता,भाई, मामी, बुवा, सारा परिवार मेरे इष्ट मित्र मेरे जीवन की भीख हर चौखट पर मांग रहे थे । प्रिय रिशु ने बाबा से भी विनती की ..अब बाबा से मिले बिना कैसे रहता , तमाम बार प्लान कैंसिल होने के बाद 15 को बाबा से विनती की मुझे कब बुलाओगे ....बीबी, बच्चे जब निघरघट्ट ही मान लेंगे मुझे ....खैर कल सायं 5.26 बाबा के श्री चरणों मे ...रात में गलत भोजन मिला होटल में सारी रात न सोया प्रातः अंतराल पर 3 जबरदस्त उल्टी ....बड़े चिंता में ...प्रातः जैसे तैसे दरबार पहुँचा । बात किया कि गलती मेरी क्या है ? इतने दिन आ ना सका , आया तो ये हाल ....दिन भर कुछ खाया नही था , ठस के खा लिया कच्ची दाल और भात भी कच्चा , क्या करता ....कोविड में कुछ कसर रह गया था क्या ? तबीयत अधिक खराब होने पर भी मैं निश्चित था और हूँ क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े बैद्य की शरण मे जो हूँ । जबकि पूरे कैची धाम में एक भी मेडिकल स्टोर नही है न ईनो मिला न इलेक्ट्रोल ....जरूरत ही क्या है । जब जी घबराता है तो खिड़की से बाबा का मंदिर देखकर फिर लेट जाता हूँ । बाबा से कल ही कहाँ था मेरे भीतर के समस्त अवगुण, माया, मोह, लोभ, क्रोध, रोग, दोष, शत्रु, विरोधी....सबका शमन कीजिये और अपने चरण शरण मे रखिये ....सर पर हाथ रखिये बाकी जिम्मेदारी मेरी ....हमको लगता है बाबा ने मेरा पंचकर्म रात से ही आरम्भ कर दिया ....। जब भी मैं ऐसे कष्ट पा जाता हूँ जिसकी उम्मीद बिल्कुल नही होती तब मेरे पिताश्री के गुरदेव श्री आद्या प्रसाद पांडेय जी की कुछ पंक्तियां याद आती है और मुझे ईश्वर क्या मानव मात्र से भी कोई शिकायत नही रहती.....
पत्नी से प्रातः से ही निवेदन कर रहा हूँ कि होटल का पैसा दे रहा हूँ, बच्चों को लेकर जाओ घुमा लाओ आसपास ही, सब तो आसपास है । जबकि जनता हूँ दूसरी गांधारी है पत्नी मेरी .....शुगर मुझे हुवा मिठाई ये छोड़े बैठी है । बाबा से कहाँ समझाओ इसे ....गयी बच्चो को घुमाने वो भी 2 बजे अपराह्न ....
मैं अच्छा महसूस कर रहा , रजनीगंधा और तुलसी का एक खुराक ले कर फील गुड महसूस हो रहा है । लेटे हुए थोड़ा गुरुदेव रविन्द्र को पढ़ा और अब आपसे बाते ...होटल का पैसा तार रहा हूँ , खिड़की से पर्वत श्रंखलाओं को देख देख उनके सौंदर्य को महसूस करते उनको धन्यवाद भी दे रहा कि तुम कितने महान और सौभाग्यशाली हो ...कितने कवियों को अमर किया, कितने ग्रंथो और रचनाओं को मूक होते हुए भी साधारण से व्यक्तियों से निर्मित करवा उन्हें असाधारण बना दिया ....और खुद वैसे ही मूक हो, सुंदरियों से भी गजब आगे हो ....कुछ इद्दर भी दृष्टि करो यार मैं भी चन्द्रशेखर ....
शेष फिर ....

Bahot umda 🙌🙏
ReplyDeleteधन्यवाद भैया
Deleteशानदार दादा 💐❤
ReplyDeleteआभार आपका
Delete