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कर्पूरी ठाकुर

पुत्र का 5 प्रैक्टिकल कल समाप्त हुवा, अब 12th में है तो तमाम बार कुछ प्रश्न ऐसे रखते है जिनके जवाब पर संतुष्ट और असंतुष्ट दोनो भाव दिखाते है और असंतुष्टि के साथ उनके तमाम पूरक प्रश्न भी जन्म लेते रहते है ....किसी पढ़ाई में कमजोर छात्र को अध्यापक द्वारा बहुत तरजीह देने पर आज उनका प्रश्न था । मैने हल्के में समझाया, दो चार उदाहरण के साथ "बेटा अध्यापक भी मनुष्य है , कोई अन्य कारण होगा ... मोह माया तुममें भी है, सबमें होता है ..मुझमें में भी" इसी संदर्भ में पूरक प्रश्न "पापा कोई पूर्णतया ईमानदार है आपकी नजर में ?" बहुत है बेटा ...जैसे पापा ??? कर्पूरी ठाकुर .... बेटा अभी परसों इनको पुष्पांजलि देकर आया हूं । ये बिहार के दूसरे उप मुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे , जितना चुनाव लडे सब विजय ही किए .... जाति के नाई थे । इनके पिता लोगो का बाल काटते थे और इनके मुख्यमंत्री होने के पश्चात भी ....मृत्यु तक इन्होंने न कोई घर बनवाया और न ही कोई गाड़ी ली ....रिक्शे से चलते थे । बेटा जैसे मुझपर यकीन करने को तैयार ही न हो रहा था ....फिर जोर देकर मैने कहा अब और जान लो .... उनकी ईमानदारी और सादगी से उनके मित्र परेशान रहते थे । हरियाणा के एक अधिकारी को देवीलाल जी (पूर्व उप प्रधानमंत्री) ने कह रखा था की कर्पूरी जब भी तुमसे 10/5 हजार मांगेंगे तब दे देना l ये तुम्हारा कर्ज रहेगा मुझपार । देवीलाल जी ने जब भी उस व्यक्ति से पूछा "कर्पूरी ने कुछ लिया" , जवाब हमेशा न ही रहता था । मुख्यमंत्री होने के बाद कर्पूरी जी के बहनोई खुद के लिए नौकरी मांगने आए । कर्पूरी जी ने 50 रुपिया निकाल कर कहा "ये लीजिए, उस्तरा और कंघी लेकर पुस्तैनी पेशा कीजिए"....अरे , बेटा जैसे खीझ सा गया । बेटा कर्पूरी जी मुख्यमंत्री थे उनके पिता को उनके गांव के पास के एक सामंती व्यक्ति ने अपने सेवा हेतु (बाल दाढ़ी बनाने हेतु बुलवाया) उनके पिता अस्वस्थ थे, जाने में असमर्थता जताई । सामंती व्यक्ति में लठैत भेज दिया कि पीटते हुए लाओ.....लोगो को पता चला, प्रशासन चौकन्ना हुवा, कप्तान ने सभी को गिरफ्तार कर लिया । कर्पूरी जी पहुंच गए उन लठैतो को छुड़ाने । कप्तान ने कहा "सर उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के पिता पर हमला करने का प्रयास किया , इन्हे हम नही छोड़ सकते".....कर्पूरी जी ने पूछा राज्य में कितनों के पिता पर ऐसी वारदात होती है । आपकी पुलिस किस किस को गिरफ्तार करती है । जाइए सामंती व्यवस्था जब न हो, राज्य में किसी के पिता पर जब हमला न हो तब मेरे पिता के बारे में सोचिए .... उन लठैतो को मुक्त करवा दिया । ....बेटा झल्लाता रहा, खुद मुख्यमंत्री थे पापा उनके बाल काटते थे ..... बेटा एक विवाह में उनके सभी मित्र आए ....वो रिक्शे से अपने ही अंदाज में मुखमंत्री बिहार होते हुए विवाह में पहुंच गए । कुर्ता फटा था ....चंद्रशेखर जी (पूर्व प्रधानमंत्री) ने अपना कुर्ता फैलाया और नेता मित्रो के सामने गए बोले इसमें कुछ डालिए कर्पूरी के कुर्ते के लिए, सभी मित्रो ने कुछ न कुछ डाला ....सारा पैसा एकत्र करके चंद्रशेखर जी ने कर्पूरी जी को यह कहते हुए दिया कि इसका कुछ और न करना अपने लिया 10/12 कुर्ते बनवा लेना ....कर्पूरी जी ने ले लिया । कुछ दिनों बाद चंद्रशेखर जी ने दूरभाष पर पूछा "कितने कुर्ते लिए ? कर्पूरी जी ने कहा एक भी नही , अभी कपड़े है । "तो पैसा क्या किया जो इकट्ठा हुवा था कपड़ो के लिए ?"...चंद्रशेखर जी ने पुछा । "हमने मुख्यमंत्री राहत कोष में डाल दिया , आप सभी को धन्यवाद" ...कर्पूरी बेटे का अंतिम प्रश्न बड़े ही विस्मय तरीके से "पापा मिला क्या ?" बेटा "एक पिता अपने पुत्र को कर्पूरी जी के बारे में बता रहा है अपने आंखों के भीगे किनारे से ....और क्या चाहिए ही मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति को ... बेटा यही अमरत्व है .... पिता पुत्र दोनो शांत श्रद्धा सुमन महानायक कर्पूरी ठाकुर जी (24 जनवरी)

Comments

  1. विनम्र श्रद्धांजलि कर्पूरी ठाकुर जी को💐💐🙏🙏

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  2. बहुत ख़ूब, शानदार लेखन।

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