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सत्याग्रह/पत्थरबाजी

सत्यगृह....
        मैं मुस्लिम भाईयों से कुछ गुजारिश करना चाहता हूँ ....
हालांकि यह जनता हूँ कि इस मुद्दे पर बात करना स्वयं को विवादित बनाना ही होगा , क्योंकि दोनों तरफ चश्मा लगा है । आपने भी लगा रखा है और हमने भी लगा ही रखा है । या यूं कहें कि पूरे समाज ने ही लगा रखा है । समय, स्थान और जरूरतों के हिसाब से हम परिभाषा,नियमों में तब्दीली चाहते है और कर ही लेते है । इसमें कोई संदेह नही की यह मुल्क आपका नहीं है । किसने क्या किया, कैसे किया, कब किया ...अभी इसमें नही पड़ते पर हुवा जो भी जैसे भी हुवा, उनकी संतति, संताने उसमे न तो दोषी होती है और न ही उनके गुनाहों की हकदार है ।
        कल हम कांग्रेसियों ने आंदोलन किया आप सबने, पुलिस प्रशासन, सरकार ने देखा ...25 स्थानों पर यह आन्दोलन हुवा ....लखनऊ और दिल्ली का तो आप सबने देखा ही होगा । क्या कोई हताहत हुवा ? क्या हमने पुलिस से कोई बर्बरता की ? क्या हमने भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यकर्ता से कोई अभद्रता की ? ....ऐसा कुछ न करते हुए भी हमने अपनी पार्टी का अपने नेता राहुल गांधी का इकबाल बुलंद किया । सरकार सोचे न सोचें पर उसके माथे पर बल अवश्य आया । इतनी प्रचंड गर्मी, इतना भय सत्ता का, सरकार का ....फिर भी कांग्रेसी नवजवान ही नही प्रमोद जी, अजमानी जी, गहलोत जी, चिदंबरम जी, मुकुल जी जैसे तमाम बुजुर्ग भी इस प्रचंड तापमान में अपने उम्र और सेहत की परवाह किये बिना सड़को पर निकल पड़े । हमारे मुख्यमंन्त्री को रोका गया । देश की पूर्व गृहमंत्री से अभद्रता हुई , उनकी पसली में फ़्रेक्चर हुवा , प्रमोद जी के फ्रेक्चर हुवा ....आप इनकी उम्र देखे, सेहद देखे और हमारा धैर्य देखे । हमने किसी पुलिस, शासन, प्रशासन से लेशमात्र भी अभद्रता नही की , किसी संपत्ति का नुकसान नही किया .....तब हम गर्व से कहते है "ये मुल्क हमारा है । इसे हमने बनाया है । इस राष्ट्र को हम माँ कहते है । ये नेता, सत्ता, मंत्री, सरकार, आला अफ़सर सब हमारे ही बीच से , इसी मुल्क से है । किसी के चाचा, मामा, जीजा, रिश्तेदार, नातेदार है .....
        मुस्लिम भाईयों अपनी दिक्कत परेशानी पर आप इस तरह आंदोलन, सत्यगृह, अनशन, भूखहड़ताल क्यों नही करते ??? 
          आपके पुरखो को गांधी ने, खान गफ्फार ने, सर सैयद ने, जयप्रकश ने, लोहिया ने, इंदिरा ने, अटल ने, ऐसे ही तो सिखाया बताया जैसे हमारे पुरखो को ....फिर आपने दूसरी तरह कहाँ से सीख लिया कि इबादतगाहो पर जब हम पूजा (नमाज) के लिए एकत्र होंगे । अपने खुदा की इबादत करेंके, खुदा के आगोश में होंगे, खुदा से बाते करेंगे ....उसके बाद बाहर निकलेंगे फिर हाथों में पत्थर होगा ??  न, न तो खुद की ये इजाजत है न मंशा , न ही ये मंजर देखकर ख़ुदा खुश होंगे....आप तो उस हज़रत की बातों पर अमल करते हो , उन्हीं के बताए रास्तों पर चलते हो जिनपर कूड़ा फेकने वाली जब एक रोज कूड़ा नही फेंकती है तब वो उसका हाल लेने उसके घर चले गए । 
        हमारे जितने मुस्लिम दोस्त है वो जब भी अपने दीन, हजरत, कुरान शरीफ, हदीस की बाते बताते है तब मैं ब्राह्मण होते हुए आश्चर्य और प्रसन्नता से ओतप्रोत हो जाता हूँ कि वाह क्या बात है ....एक आला धर्म है, बहुत ही बेहतरीन उपदेश और संदेश है, पड़ोसी के लिए, इबादतगाहों के लिए, मुल्ल के लिए, रियाया के लिए, गरीब के लिए ....फिर उनका पालन क्यों नही ? उन महापुरुषों, फरिश्तों की बातों पर अमल क्यों नही ? क्या सिर्फ बातें जान लेना, रट लेना ही पर्याप्त है ? पालन कौन करेगा? आत्मसात करके उन अच्छी बातों का प्रसार कौन करेगा ? क्या ये जिम्मेदारी भी हज़रत साहब की ही है ? फिर आपका धर्म और फर्ज ???
        मेरे एक दोस्त है आसिफ भाई । कभी कभी मेरे आफिस में दोपहर का नमाज अदा करते है । पहली बार मुझसे पूछे, अच्छी बात थी, हो सकता हो उनको डर रहा हो कि मैं ब्राह्मण हूँ, वहीं आफिस में  मेरा छोटा सा मंदिर है , रोज मैं माला ,फूल ,अगरबात्ति, पूजा करता हूँ.... शायद मैं मना कर दू । पर मैं ठहरा कंग्रेसी , अपना रिवाल्विंग हटा दिया कि पढ़ो भाई ...अब वो जब भी आते तब कहते "इजाजत है ?"  एक दिन मैं झल्ला गया "अमा जब मुझे कोई दिक्कत नही तो आप क्यों हर बार पूछते हो ?" ....आसिफ भाई बोले "आपकी इजाजत के बगैर मैं नमाज नही पढ़ सकता" ....मैं तब से सोच रहा हूँ इतनी अच्छी बात फिर ये लड़ाई क्यों ???
         मेरे दोस्त , ये जुम्मे के नमाज के बाद का बवाल लोगो की नजरों में आपके व्यक्तित्व को खराब कर रहा । आपके धर्म पर ....हम पूजा के बाद शांत होते है ,विनम्र होते है ....यहाँ तक कि किसी को अपने चरण नही स्पर्श करने देते कि कही ये कोई गुनाह न करके आया हो, मैं पूजा से उठा हूँ और मुझे स्पर्श कर ले ......और आप पूजा के बाद पत्थर ....???
न अल्लाह कतई खुश नही होंगे । हज़रत साब तो सवाल ही नही उठता ....
       आप अपनी मांगों के लिए, अन्याय के लिए अनशन, आन्दोदल ( शांतिपूर्ण) सत्यगृत.... को अपनाये, पत्थर को नहीं, ये राष्ट्र, यहाँ के लोग , ये संपति, हम सब आपके है क्योंकि आप हमारे है ....
करबद्ध निवेदन....
कल का सत्यगृह, पुलिस ने घेर रखा । वो अपना कर्तव्य निभा रही थी मैं अपना राजनैतिक धर्म "सत्यगृह"

चन्द्रशेखर मिश्र "शेखर"
सचिव, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी
व्हाट्सएप 7897868786

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