भगवान परशुराम को दैनिक चरण वंदन 🙏
आज भगवान परशुराम नारायण के छठे अवतार की शुभ जयंती है । आज के दिन अनेक शुभ कार्य हुए ....ब्रम्हा जी के पुत्र अक्षय कुमर का जन्म हुआ ! माँ अन्नपूर्णा का जन्म हुआ ! माँ गंगा का आज ही पृत्वी पर अवतरण हुआ ! आज ही कुबेर जी को खजाना मिला! आज ही पांडव को सूर्य नारायण ने अक्षय पात्र दिया ! आज ही आदिगुरु शंकराचार्य ने कनकधारा स्त्रोत की रचना की ! आज ही के दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ ! आज ही के दिन से श्री गणेश जी की सहायता से महर्षि वेदव्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरम्भ किया ! आज ही श्री बद्रीनाथ के कपाट खोले जाते है ! आज ही बाके विहारी के चरण दर्शन होते है ! आज ही प्रथम तीर्थंकर आदिवेद ने 13 माह तपस्या उपरांत गन्ने का रस ग्रहण किया ....और आज ही पवित्र रमजान समाप्त होकर शुभ ईद के रूप में फलीभूत भी है .....
तमाम लोग आज ही के दिन तमाम शुभकार्य करते है । मैं स्वयं आज कुछ न कुछ नया घर मे लाता था , अमूमन सोने की कोई वस्तु ...पर इस बार ये लेख, दवाओं के साथ सिर्फ विश्राम और अपने परशु बाबा की आराधना कि ..." मैं भी आपका ही तो अंश हूँ, मुझमे अपने अणुओं और परमाणुओं को जागृत कीजिए, सुपात्र बनाइए, मेरे पापों दोषों रोगों अवगुणों एवं शत्रुओं का शमन कीजिये और अपना कुछ अंश मुझे भी दीजिए ।
भगवान परशुराम समस्त सृष्टि के हैं । नारायण के अवतार हैं । ब्राम्हण उनका विशेष आदर पूजन करते हैं और कभी कभी बातचीत में क्षत्रियों के समक्ष अभिमान प्रदर्शित करते हैं, परंतु नारायण के अवतार सबके हैं । इधर कुछ दिनों से एक चलन चला है "जय परशुराम"... "जय परशुराम बाबा" ... ब्राह्मण युवाओं द्वारा सोशल मीडिया पर इसका बहुत प्रचार-प्रसार हो रहा है । कोई जातिगत शेखी बघारने के लिए, तो कोई राजनैतिक मंतव्य के लिए, और बहुत से अंतर्मन से , गर्व से .....
मैं उन समस्त ब्राह्मण युवाओं/युवतियों का आवाहन करता हूं । उनके समक्ष एक यक्ष प्रश्न रखता हूं
क्या आप जय परशुराम का उद्घोष सिर्फ "जय हो" "जय भीम" "जिंदाबाद जिंदाबाद" इस प्रकार से करते हैं या यह पवित्र शब्द आपके अंतर्मन से निकलता है ? क्या आपने भगवान परशुराम को आत्मसात किया ? क्या आपने कभी विचार किया कि संसार "द्रव्य की अविनाशता" के नियम पर आधारित है ...यदि हम परशुराम के संतति हैं तो उनके गुण हममें अवश्य होने चाहिए ? क्या एक ब्राम्हण के धर्म का हम अनुपालन कर रहे हैं ? क्या हमारे शीर्ष पर शिखा, हमारे कांधे पर यज्ञोपवीत, हमारे माथे पर तिलक है ? क्या हम अध्यात्म से जुड़े हैं ? क्या हमारे आचरण ऐसे हैं कि हमारे समक्ष पड़ने वाले अन्य जाति और वर्ग के लोग पूरी आस्था से महाराज प्रणाम, पंडित जी प्रणाम, स्वामी जी प्रणाम, हमको कर रहे हैं ? ....और यदि नहीं कर रहे हैं तो क्यों ??? और यदि कर रहे हैं तो क्या हममें वह सामर्थ्य है कि हम उनके कल्याण के लिए नारायण से प्रार्थना कर सकें ? क्या हम उस योग्य हैं ? क्या हम उनसे कुछ मामलो में भिन्न है, श्रेष्ठ है कि वो आत्मिक रूप से गर्व से हमारा अभिवादन करें ? या अन्य लोगो की तरह मांस मदिरा और भौतिकता में लिप्त है ?
हमारे परशुराम यदि हमारा उद्घोष सुन रहे होंगे तो हमारे आचरण को भी देख रहे होंगे ।
यदि आप चाहते हैं और सोचते हैं कि आप में बृहस्पति के अंश हैं जो देवताओं के गुरु रहे, यदि आप सोचते हैं कि आपमें शुक्राचार्य के अंश हैं जो दैत्यों के गुरु रहे, यदि आप सोचते हैं कि आपमें वशिष्ठ के अंश हैं जिन्होंने चक्रवर्ती सम्राट को एक सोटे के बल पर पराजित किया, यदि आप सोचते हैं कि आप परशुराम के अंश हैं, यदि आप सोचते हैं कि आप चाणक्य के अंश हैं जिसने तत्कालीन साम्राज्य को धूल धूसरित कर दिया, यदि आप सोचते है कि आपमे रावण के अंश है जिसने नारायण को मानव रूप धारण करने और पृथ्वी पर आने को विवश किया जिसने ज्योतिष, संगीत, वेदों और औषधियों को संसार के समक्ष प्रस्तुत किया ......
हे मेरे अनुज, हे मेरे अग्रज, हे मेरे मित्र, हे मेरे समर्थक, यदि कोई मेरा मेरे विचारों का विरोधों हो ... ब्राह्मण बंधु सिर्फ खुद खुश होकर जयंती ही न मनाए, किसी के समक्ष सिर्फ बखान तक इसे सीमित न करे ....आपको उनके अंशो का समावेश करना है ....जिस तरह एक उपासक अपने आराध्य के निकट उससे छोटा आसन लेकर बैठता है और उसके गुणों का समावेश करता है.....जैसे हनुमान जी ने सीता माता को देख सिंदूर से समस्त शरीर को रंग लिया..... जैसे माँ दुर्गा का भक्त अपने माथे पर लाल तिलक एवं लाल वस्त्र धारण करता है.... जैसे माँ काली का भक्त काले वस्त्रों को धारण करता है ....जैसे महादेव का भक्त अवधूत होता है । उसी तरह आपको भी अनुसरण करना होगा भगवान श्री परशुराम का, यदि आप ऐसा करते है आपके आचरण, आचार, विचार, व्यवहार को आपके संतति अपनाते हैं तो किसी भी विलाप, आग्रह की आपको आवश्यकता नहीं होगी । आप सदैव स्वस्थ रहेंगे । आप समाज के पथप्रदर्शक होंगे ।
आपको परशुराम जी के पितृ भक्ति को समझना होगा और माता का सर दलित महिला के धड़ में और दलित महिला का सर माँ के धड़ में लगाने का भावार्थ भी समझना होगा । ऊँच नीच का विचार त्याग कर समस्त जातियों वर्गों से प्रेम करना होगा ।
आप ग्रंथो, वेदों के रचनाकार के अंश है आप सृष्टि के नियम निर्धारक जीवन दाता प्रजापति दक्ष के अंश है । आप ब्रम्हा के अंश है .....
उतिष्ठ जाग्रतं ....उठो और जागो
भगवान श्री परशुराम, माता अन्नपूर्णा, माता गंगा, आदि गुरु शंकराचार्य, श्री कनकधारा स्त्रोत, ग्रंथ महाभारत और उनके अंश सम्पूर्ण ज्ञान गीता एवं आज के दिन हुए समस्त शुभ कार्य संपादित को करने वाले समस्त देवी देवताओं को मेरा नमन ....
आप सभी विप्र जन एवं समस्त समाज को भगवान श्री परशुराम की जयंती का हार्दिक बधाई
अनंत शुभकामनये....
विनयावत
चन्द्र शेखर मिश्र "शेखर"
सचिव
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी
व्हाटसअप 7897868786

A man of Multi dimensional personalities.. बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं आप शेखर भाई । आप के लेख के लिए आभार
ReplyDelete🙏
A man of Multi dimensional personalities.. बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं आप शेखर भाई । आप के लेख के लिए आभार
ReplyDelete🙏
आप लोग मेरे पोस्ट तक आते तो है, सम्भवतः पढ़ते भी होंगे । पर अपने विचार आप क्यों नही देते कॉमेंट बॉक्स में , संभव हो तो फ्लो भी करे ।
ReplyDeleteधन्यवाद
Har har gange
ReplyDelete