Skip to main content

खिचड़ी का दान


 निवेदन :-

खिचड़ी दान करने और ग्रहण करने से पूर्व एक बार अवश्य सोचे उस शख्स के बारे में जिसने मेहनत से इस चावल को आप तक पहुचाया है ।

निश्चित आपने धन दिया होगा इसके बद

ले में , पर धरती को चीर कर हमारे किसान भाइयों ने इसे उपजाया है । वह दौर भी था कि पैसा होने पर भी अनाज नही होता था । लाल गेहू के लिए अमरीका के रहमोकरम पर हम निर्भर थे ....निश्चित हरित क्रांति में इंदिरा जी का साहस और फैसला काबिलेतारीफ है पर पसीने से धरती को उर्वरा किया इन्ही किसानों के पूर्वजो ने ...ये उन्ही के वंशज है जिनके श्रम से आज लाखो कुंतल अनाज सड़ भी जाये तो भारत माँ की आन पर कोई फर्क नही, माँ भारती का कोई लाल भूखा नही ....

आज हमारा किसान आंदोलनरत है । अपने हक के लिए, उसे भय है भविष्य को लेकर ....

आप नही जा सकते उसके आंदोलन में ...आप सूर्य नारायण से प्रार्थना अवश्य करे ...किसानों के विजय हेतु । 

कुछ मित्र किसी कारणों से किसानों के इस आंदोलन के विरोधी हो सकते है पर किसान विरोधी हरगिज नही ...यदि वो किसानों के विजय हेतु नारायण से प्रार्थना नही कर सकते तो नारायण से यह अवश्य कहे कि ....हे नारायण 60 किसान आंदोलन में मर गए, अभी भी इस जाड़े में डटे है , प्रभु सरकार को सद्बुद्धि दो ।

जिद अच्छी नही होती है । जिद और हठ पाल्य का तो अच्छा लगता है पर पालक का हरगिज नही .....

ऐसी भी क्या जल्दी थी कि बिना संसद खुले ये कानून बने । 

ऐसी भी क्या जल्दी थी कि आपने जिन सांसदों को चुन कर भेजा है उनसे बगैर चर्चा किये ये कानून बने । यह सिर्फ सांसदों का ही नही आपका भी अपमान है । क्योंकि चुन कर तो आपने ही भेजा है ।

चलो मैं नही कहता कानून हित में है या अहित में पर जिनके लिए बनाया गया उनकी सहमति और पसंद तो जरूरी है । आप अपने परिवार बच्चों के लिए कुछ लाये और परिवार और बच्चे ही न संतुष्ट हो तो आप निश्चित बदल देंगे । ये भारत भी हमारा आपका परिवार है ....और कमसकम वो व्यक्ति जो पहली बार इस संसद में घुसने से पूर्व माथा टेक कर अंदर चरण रखा उन साहब को इस मंदिर के गरिमा की रक्षा करनी चाहिए .....

मैं नही जाता msp पर ....मैं नही जाता कि क्यों कुछ चीजों को संरक्षण से अलग किया गया ....मैं नही जाता कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर ....मैं नही जाता किसी विवाद पर किसान sdm के अलावा किसी कोर्ट में नही जा सकता .....पर मैं इतना अवश्य कहूंगा कि हमारा एक भाई हठ में है, भय में है, आशंका में है तो उसे मनाना आवश्यक है । उसकी उसके परिवार की रक्षा करना सरकार का धर्म है ।

प्रधानमंत्री जी ने बनारस में माइक नीचे कर दिया था एक छोटे कद की महिला का  ....श्रमिको के चरण पखारे प्रधानमंत्री जी ने ...चेतक की माँ तक को याद किया ....आज आवश्यकता है कि वही संवेदना आपके भीतर जागे , मानाकि चुनाव कही नही है पर भविष्य में तो होगा ही ....

नमन उन किसानों को जो हमे अन्न देते है, नमन उन किसानों को जो बंजर भूमि को भी हरियाली में बदल देते है , नमन उन किसानों को जो चारो ऋतुओ में एक भाव से रहते है ....नमन उन किसानों को जो हठ किये दिल्ली बार्डर पर बैठे है .....

अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि 60 शहीद हुए किसानों को ...उनके परिवार को नमन

सरकार के सद्बुद्धि हेतु सूर्य नारायण से प्रार्थना 🙏

और आप भी जागे इस मुद्दे पर मुखर हो इस हेतु में प्रार्थना


चंद्रशेखर मिश्र "शेखर"

व्हाटसअप 7897868786

Comments

  1. मिश्रा जी , जिस प्रकार आप ज्वलंत विषयों को प्रखर तरीके से उठाते हैं और आपकी लेखनी बहुत ही विचारोत्तेजक होती है .प्रशंसनीय

    ReplyDelete
  2. Aapne badi sundar bhasha me likha hai...agle blog me teeno bill ke laabh haani per bhi charcha kijiyega

    ReplyDelete
  3. बधाई हो शेखर भाई आपने बहुत अच्छा लिखा..

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर किसानों का विस्तृत वर्णन किया गया है,

    देश का जवान और किसान हमारी रीढ़ है, यह सरकार सिर्फ चंद उद्योगपतियों की रखैल बनकर रह गई है।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

कर्पूरी ठाकुर

पुत्र का 5 प्रैक्टिकल कल समाप्त हुवा, अब 12th में है तो तमाम बार कुछ प्रश्न ऐसे रखते है जिनके जवाब पर संतुष्ट और असंतुष्ट दोनो भाव दिखाते है और असंतुष्टि के साथ उनके तमाम पूरक प्रश्न भी जन्म लेते रहते है ....किसी पढ़ाई में कमजोर छात्र को अध्यापक द्वारा बहुत तरजीह देने पर आज उनका प्रश्न था । मैने हल्के में समझाया, दो चार उदाहरण के साथ "बेटा अध्यापक भी मनुष्य है , कोई अन्य कारण होगा ... मोह माया तुममें भी है, सबमें होता है ..मुझमें में भी" इसी संदर्भ में पूरक प्रश्न "पापा कोई पूर्णतया ईमानदार है आपकी नजर में ?" बहुत है बेटा ...जैसे पापा ??? कर्पूरी ठाकुर .... बेटा अभी परसों इनको पुष्पांजलि देकर आया हूं । ये बिहार के दूसरे उप मुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहे , जितना चुनाव लडे सब विजय ही किए .... जाति के नाई थे । इनके पिता लोगो का बाल काटते थे और इनके मुख्यमंत्री होने के पश्चात भी ....मृत्यु तक इन्होंने न कोई घर बनवाया और न ही कोई गाड़ी ली ....रिक्शे से चलते थे । बेटा जैसे मुझपर यकीन करने को तैयार ही न हो रहा था ....फिर जोर देकर मैने कहा अब और जान लो .... उनकी ईमा...

साथी हाथ बढ़ाना

प्रिय अशोक को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं !           न तो मुझे नशा है और न ही मैं पेशेवर हूँ बधाईयां लिखने का ....पर अपने क्षेत्र रूपी ग्रंथ का अध्यनरत छात्र अवश्य हूँ, जो बेहतर व्यक्ति रूपी पन्ना मैं पढ़ कर आनंदित हो जाता हूँ ...उन पर कुछ कहने को विवश हो जाता हूँ ।          इस भारी जवानी में भी साधु के रूप "डॉक्टर अशोक चौहान" मुझे प्राप्त हुए । मुझे ओशो की वो पंक्ति याद है आ गयी..." हा मैं साधु चाहता हूँ पर भभूत लभेड़े केसरिया में एक याचक नही जो दूसरों पर आश्रित हो अपने भोजन के लिए, बल्कि मैं साधु चाहता हूँ व्यवसायी के रूप में, नेता के रूप में, अधिकारी कर्मचारी के रूप में, कृषक के रूप में,अध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर.... के रूप में , मानव के रूप में .....! हमारे यहाँ तो गणिकाएं भी साधु रूप में प्राप्त हुई और मनुष्य क्या स्वयं नारायण ने उनका स्वविकार किया ......         अशोक को मैं युथ कांग्रेस के एक सिपाही के रूप में जानता था वर्षो पहले ...फिर एक समाजवादी या यूं कहें जनाब मसूद से आसक्त एक प्रेमी के रूप में .....तमाम बा...

आप सभी का आभार

सम्मानित बलरामपुर/श्रावस्ती के देवियो सज्जनो .... सादर अभिवादन 🙏 मैं अप्रत्यक्ष रूप से 1994 में कांग्रेस पार्टी से तब जुड़ गया था जब मुझे राजनीति की ABCD का कुछ पता नही था । तब मैं B Sc अंतिम वर्ष का छात्र था ....मेरे समक्ष भारतीय युवा मोर्चा एवं राष्ट्रीय छात्र संगठन दोनों से जुड़ने का मौका था ...तब तक जातिगत विष की छाया मुझ पर भी पड़ चुकी थी ...एक ऐसी घटना घटी कि मैंने "राष्ट्रीय छात्र संगठन" (कांग्रेस) की सदस्यता ले ली । मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु लखनऊ आ गया और सिर्फ अपने कैरियर को बनाने में मशगूल हो गया ......नारायण को जहाँ ले जाना होता है वो ले ही जाते है , एक घटना घटी पंकज गुप्ता युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के दावेदार थे, पर उनकी कोई सुन नही रह था । पंकज से मुझे लगाव भी था उसके स्वभाव एवं व्यक्तित्व की वजह से और मेरी नजर में वही डिसर्विंग कंडीडेट था । मैंने प्रयास किया और मैं सफल रहा ...ऐसे ही अपने दो अनुज एक को सभासद और एक को छात्रसंघ चुनाव में मेरा प्रयास सफल हुवा...और यही से आरम्भ हुवा विरोध की राजनीति । बहुत कम उम्र में बहुत बड़े लोगो ने मेरा विरोध करना आरंभ क...