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विवाह की वर्षगांठ

 


आज वैवाहिक जीवन के 17 वर्ष पूर्ण हो गए ....

क्या लिखूं 17 वर्ष बेमिशाल या 17 वर्ष बमशाल...

सर्वप्रथम माता पिता (हम दोनों के) , गुरुजन, देवाधिदेव महादेव, जगतजननी एवं समस्त पूर्वजो को हम दोनों का चरणबन्दन ....

प्रिया को पाने की चाहत ...मिलन... और उसके बाद शुरू होता है प्रेम की परीक्षा ....जीवन के कर्तव्यों, उत्तरदायित्वो के रूप में ...फिर प्रेम इन सबके साथ साथ चलता है । अक्सर सहचर को और खुद को लगेगा प्रेम गौण हो गया बाकी ही सब कुछ जीवन है ...पर ऐसा नही वही जीवन ही तो प्रेम है, जो अपना रूप बदलता हुवा विस्तार धारण करता जाता है । जहाँ हम एक एक से दो ...फिर चार ...फिर संसार .....हाँ एक डर फिलहाल मुझसे चलता रहता है कि दिन कम हो रहे साथ के, प्रेम के ...और लोकाचार में हम जन्मदिन,वर्षगांठ, जुबली और क्या क्या मानते रहते है ।

अपनी जीवनसंघनी के लिए श्री मिश्र की कुछ पंक्तिया यहाँ लिख रहा हूँ ...हालांकि जानता हूँ इन पंक्तियों के बाद भी कम प्यार और अपूर्ण प्यार की शिकायत बरकरार रहेगी ....और होना भी चाहिए क्योंकि वही पा लेने की चाहत बँधे भी रहता है एक दूसरे को ....और दूसरा भी एक महत्वपूर्ण कारण है .....कि प्यार की शुरुवात ही अधूरे अक्षर से होती है तो पूर्ण कँहा संभव.... 


प्रीति की परीक्षा तुम न लेना प्रिय,

प्रेमियों से मैं आगे निकल जाऊंगा ।

दीप की लव सी तुम टिमटिमाती रहो,

मैं पतंगे की मानिंद जल जाऊंगा ।

प्रीति की ................

इतना संताप मेरे हृदय को मिला,

देह मेरी हुई एक पाहन शिला ।

अब अहिल्या सा आया हूँ तेरी शरण,

तू मेरे वास्ते राम का है चरण ।

सिर्फ छू ले तो पत्थर रहूंगा नही,

आदमी होकर पूरा बदल जाऊंगा ।।

प्रीति की तुम.......

प्यार जग में किसी का न पूरा रहा,

पहला अक्षर ही इसका अधूरा रहा ।

यार मिलके बने शब्द वो प्यार है,

प्यार के वास्ते यार अनिवार्य है ।

मुझ अधूरे को गर प्यार पूरा मिले,

तेरा बनके पूरा अधूरा मैं चल जाऊंगा ।

प्रीति की तुम.....

अश्रु मैं आंख तू है सुघर लाल है 

मैं पलक से गिरा तो तेरा गाल है ।

गाल से भी गिरू तो है ग्रीवा तेरी,

फिर पतन ही पतन और जंजाल है ।

एक उंगली से भी रोक ले गर मुझे,

तो गिरते गिरते मैं संभल जाऊंगा ।

प्रीति की तुम परीक्षा न लेना प्रिय,

प्रेमियों से भी आगे निकल जाऊंगा ।।

........

ससुराल वालों को धन्यववाद, प्रिय पत्नी को शुभकामनाये ...आप सभी को यथोचित नमन,स्नेह व आशीष ....


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