*हम भारत के लोग* ....
आज स्वतंत्र है ... 1947 से ही स्वतंत्र है। मेरी जितनी उम्र है मैने उतनी स्वतंत्रता देखी , कोई 84 साल की उम्र का होगा तो उसने 74 साल यही स्वाद लिया...अमूमन 10 वर्ष की आयु में होश संभल जाता है ।
हम सबको बधाई देंगे , सबकी तरह ही ...कुछ प्रश्न स्वयं से स्वयं कर रहा ....लगभग संवेदनशील देवियों एवं सज्जनोँ के अंतर्मन को ये सवाल चालते ही होंगे ...पशुता है तो कोई बात ही नही ।
मैं एक राजनैतिक दल से हू, इस लेख के बाद मुझपर भी सवाल उठेंगे ...जैसे मोहम्मद गोरी, कासिम और बाबर के नाम पर आज की पीढ़ी को गालियां मिलती है । स्वागत है ...
*हमारे पूर्वज ने इतनी लंबी लड़ाई लड़ी ही क्यों ?*
नमक कानून तोड़ने को ? कपास की खेती के लिए ? नील की खेती के खिलाफ ? पैसों के लिए? हमारी सोने की चिड़िया को कोई लुटे न इसलिए ? किसानों की ही हालात सुधारने के लिए ? गांधी की पगड़ी उतरी ये कारण या स्टेशन पर फेंक दिए गए इसलिए ? बंगाल से शुरू हुआ टैक्सेशन का खेल गवर्नर जनरल तक पहुँचा उसके ख़िलाफ़? कुछ वकील इज्जत चाहते थे, बराबरी चाहते थे इसलिए? देश मे हिन्दू मुस्लिम दंगा हो इसलिए ? या दो लोगो के प्रधानमंत्री होने के लिए ? या हमको बापू मिल जाए इसलिए ? .....तमाम प्रश्न
*हम चलते है 1947 से पहले ....*
हम भारत के लोग स्वतंत्र हैं, स्वाधीन है , राष्ट्र स्वायत है ....
क्या मानव सुखी है ? भारत का हर लाल सुखी है ? भारत की हर देवी .....
कितना कुछ बदला?
क्या 1947 में वो नंगा फकीर हड्डियों का ढांचा लिए जिस वजह से कलकत्ता में भोजन त्याग दिया वो वजह खत्म हुई ?
क्या जिन हालात को सुधारने के लिए आज़ादी के बाद हमारे सभी नेताओं और दल ने जो मेहनत और ईमानदारी से कार्य किये किसानों के लिए ....सिचाई, बाँध, बैंकों का राष्ट्रीयकारण, हरित क्रांति, स्वेत क्रांति, पीली क्रांति, नीली क्रांति , ट्यूबबेल, बिजली, पानी, खाद, ब्लॉक,प्रधानमंत्री सड़क योजना, किसान वीमा ....
क्या आज हम किसान को दरिद्रनारायण कहना बंद कर चुके ?
1947 से आज तक हमने राजनीति में एनिबेसेन्ट से जो शुरुवात की....नारी समाख्या,महिला आयोग,महिला थाना, आंगनवाड़ी, महिलाओ के हक को समाज मे रखना..33%.....1090...पहली PM, पहली आईएएस, पहली PCS, पहली मुखयमंत्री.... वो सुचिता कृपलानी, इंदिरा, मीरकुमार, सुषमा,नज्माहेपतुल्ला, सोनिया, मायावती, जयललिता, ममता तक होते हुए ...
क्या आज बेटी सुरक्षित है ? क्या रात 11 बजे हमारी आपकी बहन बेटी अपने पिता की दवा अकेले सारे हिंदुस्तान में कही ला सकती है? क्या दिन में 11 बजे बिना कलुषित निगाहों के वार सहे घर वापिस आ सकती है ? क्या हाइस्कूल और इंटर की परीक्षा अकेले देने जा सकती है?
.....दलित आयोग, ओबीसी की लड़ाई, आरक्षण, तमाम छात्रावास, वजीफे, दलित मुखयमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी ....क्या दलित आज मुख्यधारा में आया ? क्या जातिगत गालियां बन्द हुई? क्या घर मे अलग बर्तन नही होता अछूतों के लिए ?
ये सारे सवाल खड़े है जस के तस....
मेरे दोस्त गांव घूमो ...गरीबी देखो, जातिगत लड़ाई देखो, आरक्षण का वैमनस्य देखो, राजनैतिक दल में भी प्रतिभा को धता बताते हुए जातियों का गठजोड़ देखो ....रोटी और बच्चों के लिए इज्जत से समझौता करती देवी देखो ....नितांत पिछड़े इलाके में बीज और खाद के लिए मदर इंडिया का वो लाला देखो ...मजबूर वो नरगिस देखो, और बदले की भावना में झुलसता और मौत के मुह में जाता हुवा सुनीलदत्त देखो .....मजबूर किसान देखो यही नही मज़बूए आईएएस देखो, मजबूर IPS देखो, बिकता विधायक देखो, 5000-5000 पर एमएलसी और 2000-2000 हजार पर बनता हुवा ब्लॉक प्रमुख देखो ....एक डॉक्टर और एक अशाबहु से चलता हुवा 10 कमरे का अस्पताल देखो, 2 अध्यापक और 1 चपरासी से चलता हुवा करोड़ो का विद्यालय देखो ....बिकती हुई नवयवना देखो, बिकने को मजबूर नवजवान देखो ....मुर्गे और दारू पर सेटिंग देखो .....बढ़ते हुए सवर्ण और इमानदार अधिकारी/नेतापर लगता हुवा हरिजन उत्पीड़न और बतालत्कार के फर्जी मुकदमे देखो । सुबह से शाम पसीना बहाते व्यवसायी को सामाजिक चोर के रूप में प्रचारित करता मुखिया देखो ....क्या क्या दिखाऊ ....क्या क्या देखोगे ? इसी मुल्क में .... जहाँ बलिदान हुए भगत, आज़ाद, बिस्मिल , ...और न जाने कितने अनगिनत नाम...आज उनके परिवार के लोग क्या अफसोस नही करते होंगे ?....क्यों मर गया तू, किसके लिए , आज तो तेरे घर की बेटी, किसान, नवजवान, बद्दतर हालात में .....
बड़ा अजीब लग रहा होगा न ? मन मे कुलबुलाहट होगी ...तुम्हारे ही कांग्रेस ने...आज भी एक दिन ये शकून से नही बैठा , बधाई नही दे रहा, होर्ल्डिंग पोस्टर नही लगवा रहा ....न जाते कितनी बाते जिससे हमको जलील करके आपको आत्मसंतुष्टि मिलेगी ।
पर पता है ....हम भारत के लोग जानवर से बदतर या जानवर है ....वो अपने द्वारा जन्मे से संभोग को उतावले होते है हम पड़ोसी, रिस्तेदार और बगल वाली से ....वो अपने जन्मे बच्चो का खाना छीन खाते हम विभाग, छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन, विकलांग, विद्यालय का भी खा लेते ...हम सड़क, अस्पताल ,यहां तक कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा भी खाने को आतुर ....
कोई मोदी, कोई राहुल, से न बदलेगा ....चली गयी इंदिरा , चले गए अटल...हुवा क्या ??
ये मुल्क आपका है। जिम्मेदारी आपकी है, उम्र आपकी 60-65 हैं उसी में लडप्पन, जवानी बुढापा,रोग,मेहनत, कैरियर....और उसी में हिन्दू मुसल्मा...दलित सवर्ण...अगड़ा पिछड़ा....नर नारी
हम आजाद है । आप सभी राष्ट्रवासी को 74वे स्वतंत्रा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं....
पर एक बात जो कहानी है अब भी .....
हम भारत के लोग ।
Bade achhe vichaar
ReplyDeleteआभार आपका
Deleteसुभकाममाये
ReplyDeleteधन्यवाद भैया
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