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भारत के राजीव

76 वर्ष के होते राजीव जी यदि हमारे बीच होते....किसी राजनेता के लिए ये उम्र कोई अधिक नही है । काल के ग्रास ने लील लिया ....वो होते तो प्रतिक्रिया क्या होती पर जितने भी लोगो से राजीव जी पर चर्चा हुई वो व्यक्ति किसी भी राजनैतिक दल का रहा हो उसकी बातों में सिर्फ अफसोस ही दिखा राजीव जी के न होने का । यह अफसोस हमदर्दी नही होती है ....उनके हाथ मे एक बेहतर भारत की वो शख्स कल्पना बया करने लगता है....
विडंबना ही होती है कि जो जवाहर लेखनी के पुजारी थे वो....जो अटल कवि हृदय थे वो .....और जो जहाज चलना ही अपना नियति मांन बैठा उसे देश चलाना पड़ा .....सबसे बेहतर आश्चर्य तो एक अन्यन्त साधारण और शर्मीले व्यक्ति का महामानव हो जाना बापू के रूप में .....
राजीव जी की सरलता और सहजता ही थी कि उनके सबसे विस्वस्थ ने ही उनकी पीठ में छुरा घोंपा । ये सरलता ही थी कि खान अब्दुल गफ्फार ने अपनी पोटली किसी के सामने न खोली , पर राजीव जी के पूछने मात्र से ही ..."तेरी माँ भी पूछती थी कभी नही दिखाया पर तु तो नाती है , देख ले" ......ये उनका सौम्य व्यक्तित्व था कि तीन पीढ़ी के धुर विरोधी अटल जी ने एक बड़े पत्रकार को डपट लिया " आप मेरे मुँह से राजीव जी की बुराई करवाना चाह रहे है, ये जीवन उनका दिया हुवा है" .....ये उनकी सहजता ही थी कि श्री लंका का दर्द न देखा गया उनसे, उस दर्द को दूर करने में हम सबको दर्द दे गए और हमसे जुदा हो गए हमेशा के लिए ....
आज हम कितने आराम से पल भर में अमरीका या लंदन को अपने सामने पा लेते है, आज कई दिनों के गढ़नाओ को हम मिनट में पा लेते है , हम समस्त भारतीय को ऋणी होना चाहिए दूरसंचार के क्रांति और कंप्यूटराइजेशन के लिए राजीव जी का ....। गांधीवाद को सच्चे रूप में परिभाषित किया पंचायती राज लाकर और पंचायत में महिलाओं की 33 प्रतिशत की भागीदारी ने तमाम कुप्रथाओं को धता बता दिया । तमाम बेटियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ दिया । विवाह के आयु से भी कम आयु में सरकार बनाने का निर्णय देकर युवाओ को जिम्मेदारी का अहसास कराना भी एक क्रांति ही रही । कही अटल जी को मैन पढ़ा कि वो विदेशमंत्री थे , जहाज में बैठे थे एक नवयुवक पायलट अपने केबिन से आकर अभिवादन किया ...औपचारिक रूप से अटल जी ने जबाब दिया और अटल जी ने राजीव जी के प्रधानमंत्री होने पर कहा कि मुझे पता ही नही था केबिन से निकल कर अभिवादन करने वाला वो नवजवान इंदिरा जी का बेटा था । "भारत के राजीव" में सिम्मी गिरेवाल ने जो सहजता राजीव जी की दिखा दी वो हर शख्स के लिए प्रेरणा है । आज साधारण परिवार के बच्चे भी जिन कार्यो से परहेज करते है उनके लिए सबक है कि इंदिरा जी के प्रधानमंत्री होते हुए भी राजीव जी ने अपने विद्यार्थी जीवन मे आइसक्रीम बेची, अखबार बेच कर अपने खर्चे पूरे किए.... राजीव जी का हर निर्णय लगभग सही रहा। एक प्रेमी के रूप में सोनिया जी का चुनाव भी उनका गौरवान्वित करने वाला ही रहा। फैशन की दुनिया मे जन्मी वो महिला आज भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो कितने सालो से अपने विधवा जीवन को जीते हुए भारतीयता की सच्ची प्रतिमूर्ति है । जिनके सर से पल्लू कभी सरक न सका । आज हम हर निर्णय जातियों में माध्यम से करने के आदि हो चुके है । सोनिया जी को देश का कमान सौपने की बात आई तो उस सख्स को दे दिया जिसके जाती के लोगो ने उनकी सॉस और भारत की आत्मा को छलनी किया था । उन्होंने एक सिख को 10 वर्षो तक देश सौंप कर जातीय कटुता को  तोड़ने का प्रयास किया । सोनिया जी का बलिदान....सुषमा जी के सर को मुड़वाने की बात सुनकर उन्होंने प्रधानमंत्री पद को त्याग दिया.....
वही उनकी बेटी चार कदम और आगे बढ़ कर अपने पिता के हत्यारिन से मिलने जेल चली गयी .....उस गर्ववती नलिनी के लिए वहाँ के जेलर से निवेदन कर बैठी की इनको सारी सुविधाये दी जाए, (चूंकि नलिनी गर्भवती थी) । उन राष्ट्रद्रोहियो को सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी ने माफ  किया। कहने और सुनने में बड़ा आसान है पर कल्पना करने मात्र से कालेजा दहल जाता है ....उफ्फ इतना बड़ा हृदय ? फिलहाल मैं मानवमात्र से ये कल्पना भी नही कर सकता ।
बहुत कुछ मन मस्तिष्क में चल रहा है । एक कौतूहल सा है क्या क्या कह दु आपसे , कितना कह दू.....पर सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी को देख कर सारी बातों से सिर्फ एक बात निकलती ....कोई यू ही नही होता है राजीव ।
श्रद्धासुमन

Comments

  1. शेखर भाई हमेशा की तरह एक बार फिर से आपको बधाई एक बढिया लेख के लिए..
    बधाई की मात्रा थोडी अधिक है क्योंकि मेरा मानना है कि आपका हर नया लेख आपके लेखन कला के उत्कर्ष की ओर एक कदम और होता है यदि मेरी बात से सहमत हों तो बधाई की अधिक मात्रा भी स्वीकार करें।
    स्व.श्री राजीव गांधी जी को नमन..
    🙏

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  2. Bahut badiya dada bhasha shaili bahut badiyahai..badhaai

    ReplyDelete
  3. Ullekhniya Lekh...

    Main ek Navodaya vidyalaya ka Vidyarthi raha hu.. Mujhse behtar kaun unke karyo koi samjhega.. ham jaise lakho baccho ka Bhavishya banane wale Divangat nahi hote...

    Sada hi Amar hote hai... Jaise ham Ram ko nahi bhule, Krsihna ko nahi bhule.. to Adhunika Bharat ke Nirmata ko kaise bhul sakte hai..

    Shat Shat Naman !

    ReplyDelete

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