भाई राजीव त्यागी जी नही रहे । शाम को लाइव डिबेट करते करते ....दोषी कौन?
क्या सांवित पात्रा का हृदय उनसे अकेले में सवाल नही पूछता होगा ? क्या अन्तरात्मा धिक्कारती नही होगी । यहाँ तो जरा भी गलत हो जाये, किसी को बेवजह डांट भी दू तो अपसेट हो जाता हूं । मैं नही जानता कुपत्रा क्या सोच रहे होंगे । स्वयं को कोस रहे होंगे या वही कुटिल मुस्कान ...और गर्व महसूस कर रहे होंगे कि मोदी जी के कांग्रेस मुक्त अभियान में हमने सिर्फ किसी के विचार ही नही बदला बल्कि शरीर ही बदल दिया ।
राजीव भैया से पिछली मुलाकात मीडिया हाल के पीछे हुई । तब प्रियंका जी और सोनिया जी के रायबरेली आगमन के पश्चात भैया उत्तर प्रदेश कमेटी में मीडिया के चेयरमैन नियुक्त हुए थे , हालांकि महासचिव तो थे ही । राजीव जी पद के मोहताज नही थे ....एक मुलाकात में एक पत्रकार ने भैया से विस्टिंग कार्ड माँगा हस्ते हुए बोले "हमने तो आज तक कार्ड छपाया ही नही" ....मैं ह्म्म्म की सहमति के साथ बोला "भैया मैं कार्ड बनवाता हु आपका" .... कार्ड दो डिजाइन में मैन बनवाया....क्या हुवा मैं जान भी न सका कि उन्हें चेयरमैन पद से मुक्त कर दिया गया ....कार्ड रखा था मेरी सफारी में इस इंतजार में कि अगली मुलाकात में भैया को कार्ड दूंगा ।
आज ही कार्ड को हवा में आज़ाद कर दिया ।
बहुत व्यथित हु, दुखी हूं, हैरान हूं । परसो रात को नींद की दवा खा कर सोया जब 1 बजे रात तक वही चेहरा ...वही बाते ....उनकी आवाज़ गूंजती रही । सोचा पत्नी को जगा लू, अपनी स्थिति बताऊ... खैर दावा खा कर सोने का प्रयास किया ।
मेरे मित्र व अनुज अंशू अवस्थी को भैया बहुत मानते थे । अंशु भी भैया का बहुत सम्मान करते थे ...अंशु ने कल अपने प्रेम एवं सम्मान को कोतवाली हजरतगंज में तहरीर के रूप में प्रदर्शित भी किया । अंशु तुम्हारा गुस्सा जायज है । हम तुम्हारे साथ है ....थैंक यू इस FIR के लिए । करना तो PCC को चाहिए ....
हम माध्यम वर्गीय जिनके ऊपर कोई वरदहस्त नही होता , हम अच्छे नेता को अपना अभिभावक मान बैठते है , हमे स्नेह हो जाता है, उनको लेकर हमे कॉन्फिडेंस हो जाते है ....एक आस होती है ...हम अकेले नही, भैया मेरी बात कहेंगे ....एक अभिभावक इस तरह चला जाये ....अपार कष्ट ...उसे शब्दो मे बया नही किया जा सकता ।
मीडिया कर्मी और चैनल वालो आपको विचार करना होगा । आपने अपनी भावभंगिमा देखी है , अपने कटु शब्द, अपने आचरण को निहारो ....क्या देकर जाओगे इस समाज को, इस संसदीय व्यवस्था को, मीडिया को ....पूर्व के चौथे स्तंभ के इन रखवालो को पढो, देखो , उनके विचार उनके शब्द उनकी रचना, उनकी विनम्रता ....और आप बाजार में खड़े हो TRP की होड़ में वेश्याओं से शब्दों का श्रृंगार कर रहे हो । मार दिया न आपने TRO बढ़ाने की होड़ में, अदा कर दी अपनी कीमत ....एक बेहतर राष्ट्रनेता खा लिया आपने ....
ये मुल्क आपका है । आपके बच्चे भी होंगे आपके बाद, नेता भी हो सकते है ....और पात्रा अपने डिबेट को देख लिया करो, डॉक्टर हो न? लोग मिशाल देते है फला डॉक्टर अपनी बोली से आधा दुख हर लेता है ....उस बिरादरी से हो न ? मुझे याद है आपकी भाषा ...."कौन बोला कौन बोला ये बाबर कहा से आ गया" ...."पप्पू"... "इटली वाली बाई"...बाप है वो पूरे देश का" जयचंद...लुटेरे...। विचार कर लो , कितने की आह लूटोगे ....जिस पार्टी के भांड बने हो उनके पूर्वजो से ही कुछ सीख लो ....सीख लो अटल जी से...सीख लो आडवाणी जी से ....धिक्कार है आप पर । मिलकर मीडिया के साथ इस राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करो ये कहकर की आप भारतीय संस्कृति के रखवाले हो ।
राजीव भैया की मौत आपके नाम ही लिखेगा इतिहास ।
नारायण राजीव भैया को अपने श्री चरणों मे स्थान दो । राजीव भैया हम कांग्रेसियों को आप पर गर्व है ...आपकी गर्जना हमको साहस एवं प्रेरणा देगी ।
chandra shekher bhaiya ki jai
ReplyDeleteधन्यवाद
Deletechandra shekher bhaiya ki jai
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteकुछ नाम और थे अंशु अवस्थी जी के पीछे पर पीछे तो पीछे नीचे तो नीचे। 🙏😊 समय पर सम्भन्ध निभाना आता है पर चुपचाप और शांत चित्त से उन्हें
ReplyDeleteजनता हूँ समस्त नाम लिखना सम्भव न था, शिकायत किसी न किसी को होती ही ....लेख भी पठनीय रखना था ।
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