कुछ बात ही थी कि हस्ती याद आती रहेगी तुम्हारी .....
भावभीनी श्रद्धांजलि ग्रेट अमर सिंह ....सलाम / शतशत नमन
......भारतीय राजनीति में, उद्योग में और फिल्मों में ....सबसे बड़ी बात की साधारण परिवार में जन्म लेकर इस मुल्क की जितनी भी उचाइयां रही अमर सिंह का सिर्फ हस्तक्षेप ही नही धाक रही है ।
अम्बानी हो या महानायक अमिताभ बच्चन या कोई भी राजनैतिक अमर सिंह के प्रभाव में ही रहा।
मुझे व्यक्तिगत पसंद थी उनकी बेबाक जुबानी जो शायद ही अब आगे कोई राजनेता उस परिपाटी पर चल सके ।
मुझे अपने मित्र श्री पंकज तिवारी से ये शिकायत भी रहेगी कि उनके अमर सिंह से व्यक्तिगत संबंध होने के बावजूद वो मुझे अमर सिंह से मिला न सके ।
आज़मगढ़ में जरूर कोई खास बात है वहां शक्शियत ही निकलते ही रहते है विख्यात या कुख्यात ....जैसा आबोहवा मिलता है उसी में टॉपर हो जाते है आजमगढिया ।
टाटा के घर की बेटी जिसे भाई से अधिक प्यार करती हो , महानायक जिसके मित्र हो, अम्बानी जिसकी बात न टाल सके ....समाजवादी पार्टी को जिसने उत्तर प्रदेश से उठाकर देश मे चर्चित बना दिया एक क्षेत्रीय पार्टी के मंच पर उद्योग, वालीवुड को लाकर बिठा दिया । और यही नही अपने मित्र मुलायम को उन्होंने जितनी खरी खोटी सुनाई शायद मुलायम सिंह जी ने कल्पना भी नही किया होगा । ऐसा सुना है मैने कि अखिलेश जी की पढ़ाई से लेकर विवाह तक मे अमर सिंह की प्रमुख भूमिका रही । इसी कारण से अखिलेश जी द्वारा बाहरी कहने पर वो तिलमिला गए थे । अपने ववक्तव्यों की वजह से सदा चर्चा में रहे ।
फ़िल्म "हमारा दिल आपके पास", "जेडी" और "यमला पागल दीवाना" में रोल भी किया । उनकी चर्चित पुस्तक "रिलीजन इन पोलटिक्स: गांधियन पर्सपेक्टिव इन द प्रेजेंट कॉन्टेक्स्ट" .....और विश्व आर्थिक मंच को संबोधित करना ....न्यायिक हिरासत में भी कुछ दिन रहना ...और आर्थिक सम्पन्न होना....
जाया बच्चन को फटकार, आज़म खान को सदैव चैलेंज, रामगोपाल को उल्टा सीधा कहना, अखिलेश को नामज़वादी कहना ....ये सब सामान्य घटना रही उनके जीवन की । अपने दोस्त मुलायम को तो उन्होंने इतना खरा खोटा कहा कि यदि मैं यहां लिख दूंगा तो तमाम समाजवादी अनुजों के कोपभाजन का शिकार हो जाऊंगा ।
यह सब कहने का मेरा ये कतई मकसद नही की उन्होंने लोगो को ऐसे कहा ...बल्कि मैं उनके साहस और साफगोई को सलाम करता हूँ । मुझे लगता है अमर सिंह यदि अपनी पार्टी बनाने के बाद उत्तर प्रदेश के समस्त सीट पर प्रत्याशी न उतारते और 50 सीटों पर ही फोकस करते तो संभवतः अपनी पारी और बेहतर खेलते । उनसे वही गलती हुई जो गलती श्री कल्याण सिंह ने की थी । हमारे गुरु श्री रामबक्श श्रीवास्तव (MLK PG College, Balrampur) अक्सर कहते थे , पास ही होना है तो सिर्फ 2 चैप्टर ही पढो, फर्स्ट क्लास पास होना है तो 4 चैप्टर पढो ( अमूमन तब10 चैप्टर होते थे और 5 सवाल ही करने होते थे B. Sc. में )....अधिक पढ़ने की क्या जरूरत ....सारे चैप्टर पढ़ने में कल्याण सिंह और अमर सिंह अपनी पार्टी को जीवित न रख सके ।
मैं बहुत ही साधारण परिवार से हूँ ...मेरे लिए ये बड़े आश्चर्य की बात है कि कोई भला समस्त क्षेत्रो में अपनी पहुंच कैसे बना सकता ?
...मुझे यह भी अफसोस रहेगा कि अमर जी आप मेरे कांग्रेस में क्यों न रहे, मिजाज तो आपका कांग्रेसी ही रहा ..... कुछ बात तो थी ही अपने अमर में जो उनको भारतीय पटल पर अमर कर गयी ...
चंन्द्रशेखर मिश्र "शेखर"
Chandra shekhar bhaiya ki jai ho...
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteधन्यवाद
ReplyDelete