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Showing posts from July, 2020

बुलबुल (भाग-2)

एक बार पुनः आपको ले चलता हूं उसी बुलबुल की ओर ...... सामान्य रूप से बुलबुल आकर अपने घोसले में बैठी रहती थी ,जो तीन अंडे उसने दिए थे उसे "सेती" रहती थी  हमारे क्षेत्रीय भाषा मे "सेना" ही कहते है । जब पक्षी अपने अंडे पर बैठकर  उसे गरम करती है, उसका रक्षा करती है,माँ रूपी साधना करती है। नारी के महान होने में, इस जगत को जीवंत बनाये रखने में,  जीवन चक्र को चलाये रखने में .. पुरुषों से आगे और पिता से भी महान होकर सिर्फ माँ, ममता मयी माँ ही नही देवी की उपाधि से विभूषित हो जाती है .... वह प्रक्रिया। वही करती रही। कभी मुझे डर कर उड़ जाती थी तो कभी ढीठ की तरह देखती रहती थी और तब मैं डर जाता था...  की कही चोंच से मुझ पर वार न कर दे प्रतिरक्षा में ...कही मेरी आँख ....और मैं स्वयं पीछे हो जाता था ।  ये मन कभी कभी इतना व्याकुल हो जाता था कि इसे सहला लू । प्यार कर लूं, एक माँ को अभिवादन कर लूं ... पर वही डर की फुर्रर्रर्रर्ररर हो जाएगी। मैं बाधक हो जाऊंगा इसकी साधना में । बस मैं बगल में ... "अब तो और नजदीकी हो गयी" मोबाइल, अखबार में व्य...

बुलबुल (भाग-1)

महादेवी जी के गिल्लू ने बचपन में प्रभावित किया था लेकिन उसका आनंद मुझे अब प्राप्त हुआ ...... 2 जुलाई की बात है, मैं अपने बरामदे में बैठा था । मेरे बगल में एक गमले का वृक्ष जिसकी ऊंचाई महज 4 फीट होगी । मुझे वृक्ष नहीं कहना चाहिए, दरअसल वो पौधा है ।  उस पौधे में एक बुलबुल का बार बार आना ....अखबार पढ़ते हुए भी मैं उस दृश्य को देखने के लिए विवश हो गया । आखिर यह चिड़िया बार-बार यहां क्यों आ रही है ? मन में कौतूहल .....तमाम बातें आने लगी..... इसे मेरा भय क्यों नहीं ?, फिर एहसास हुआ एक नहीं दो चिड़िया बारी-बारी से आ रही है और उस पौधे में कुछ कर रहे हैं ।  ओह.... घोंसला बना रही है । मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा ....मैं पूरी इमानदारी से कहता हूं यदि मैं अपना घर बनवा रहा होता तो शायद इतनी खुशी मुझे ना मिलती जितना यह दृश्य देखकर.... मैं तकरीबन ढाई घंटे बैठा रहा । बहाना अखबार का था, पर देख रहा था उनकी हरकतों को, उनके लगन को, उनके मेहनत को, उस जोड़े के एक दूसरे के प्रति समर्पण को, और गर्व सा महसूस हो रहा था.... कि देखो मुझसे 2 फुट दूर रखें इस पौधे पर यह आ रहे हैं,   निश्चिं...

"आपदा में अवसर"

बड़ा हांच पॉच है चारो तरफ ..... कॅरोना का कहर, टिड्डियों का कहर, आसाम में बाढ़ का कहर, बार्डर पर चीनी सेना का कहर, काश्मीर में आतंक का छिटपुट कहर.....बाकी उत्तर प्रदेश की क्या कहूं.....??? कुछ नवजवान भविष्य, नौकर, EMI को लेकर परेशान ....तो कुछ हुंकार भर रहे कि " आएगा तो मोदी ही " । सच कहूँ तो भविष्य और वर्तमान दोनों को लेकर मैं भी बहुत चिंतित हूँ। बेटा बड़ा हो, गया इस साल बोर्ड है । हमारा था तो पापा  बहुत सतर्क थे, पढ़ाई तो पढ़ाई प्रोटीनेक्स का डिब्बा भी ले आये थे, मम्मी रोज रात दूध में मिला कर देती थी। मेरा वाला तो स्कूल भी नही जा पा रहा, ट्यूशन कोचिंग की तो बात ही कहा रह गयी covid19... सरकार ने कुछ राहत बातो ही बातों में दिया, कि emi, मिनिमम बैलेंस, विद्यालय फीस....कुछ आराम मिलेगा । बाकी मिलेगा या नही ये तो आप जान ही चुके होंगे । जो मेरी स्थिति है कमोबेश सबकी वही होगी , मोदी वाला हो, अखिलेश वाला हो, योगी वाला हो ,बुवा वाला हो ....या मेरे जैसा निठल्ला कांग्रेसी । प्रधानमंत्री जी ने कहा कि "आपदा में अवसर खोजो " ....तमाम लोग खोज भी रहे । बहुत बड़े व्यव...