एक बार पुनः आपको ले चलता हूं उसी बुलबुल की ओर ...... सामान्य रूप से बुलबुल आकर अपने घोसले में बैठी रहती थी ,जो तीन अंडे उसने दिए थे उसे "सेती" रहती थी हमारे क्षेत्रीय भाषा मे "सेना" ही कहते है । जब पक्षी अपने अंडे पर बैठकर उसे गरम करती है, उसका रक्षा करती है,माँ रूपी साधना करती है। नारी के महान होने में, इस जगत को जीवंत बनाये रखने में, जीवन चक्र को चलाये रखने में .. पुरुषों से आगे और पिता से भी महान होकर सिर्फ माँ, ममता मयी माँ ही नही देवी की उपाधि से विभूषित हो जाती है .... वह प्रक्रिया। वही करती रही। कभी मुझे डर कर उड़ जाती थी तो कभी ढीठ की तरह देखती रहती थी और तब मैं डर जाता था... की कही चोंच से मुझ पर वार न कर दे प्रतिरक्षा में ...कही मेरी आँख ....और मैं स्वयं पीछे हो जाता था । ये मन कभी कभी इतना व्याकुल हो जाता था कि इसे सहला लू । प्यार कर लूं, एक माँ को अभिवादन कर लूं ... पर वही डर की फुर्रर्रर्रर्ररर हो जाएगी। मैं बाधक हो जाऊंगा इसकी साधना में । बस मैं बगल में ... "अब तो और नजदीकी हो गयी" मोबाइल, अखबार में व्य...
सचिव, उत्तर प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी