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Showing posts from June, 2022

मुख्यमंन्त्री मासूम है असम के ....हम होशियार

 यह व्यवस्था है । प्रसन्न हो जाइए और गर्व कीजिये ..."सबका साथ सबका विकास" का नारा लगाते रहिये.... "असम में पानी की बोतल 100 रुपये में"  एक तरफ विधायकों के रुकने की बेहतरीन पांच सितारा होटल में व्यवस्था और दूसरी तरफ उसी राज्य में पानी की एक बोतल 100 रुपये में ....अखबार में पढ़ा होगा आपने भी और पलट कर आगे बढ़ गए होंगे । मन परेशान रहा होगा उद्धव और एकनाथ शिंदे को लेकर ...या द्रोपती जी की हालत और उनके भाग्य पर चर्चा ....पर मित्र न तो हम/आप शिंदे है, न उद्धव , न द्रोपती है और न ही यशवंत ... हम/आप वही आम आदमी है जो 100 रुपये की पानी की बोतल खरीद रहे है, विवश है । उस राज्य में जहां ऐसी व्यवस्था है और मजे की बात ये की वहां के मुख्यमंत्री को पता ही नही की उनके राज्य में 40/45 विधायक कई दिनों से रुके है और उनकी सुरक्षा उनकी पुलिस कर रही ...तो बेचारे को 20 की बोतल 100 वाली बात हरगिज न पता होगी । मेरे असम के दोस्तो कितने गर्व से आपने नारा लगाया होगा, वोट दिया होगा और ढेर सारी उम्मीद भी की होगी । टैक्स आप देते हो, चुनाव में वोट आप देते हो, देश की अर्थव्यवस्था में ठेले खुनचे से लेक...

बाबा नीब करौरी

 बाबा नीब करौरी पल पल चरण वंदन .... कुछ नही जानता था बस कही कभी कम्बल ओढ़े बाबा का चित्र देख लेता था ....मैं तो ठहरा निरा गवार मुझे कुछ आता जाता थोड़े , जहां कही ऊंचा स्थान भी दिख जाए बचपन की डेवहार देवी, ग्राम देवता समझ सर झुक जाता है ।  मंदिर तो मेरा ही है पर आप यकीन करें कि इतना मूढ़ और गवाँर हूँ ( आज कल की तरह समझदार थोड़े हूँ ) मस्जिद, गुरुद्वारा और श्रावस्ती के जितने बौद्ध मंदिर है कही कोई जैन मंदिर या फिर कोई चर्च ...सर खुद ही झुक जाता है । कह सकते हो पथभ्रष्ट कंग्रेसी हूँ या 36 करोड़ भी कम पड़ जाते है मुझे, लालची बहुत हूँ ....बचपन मे दादी सामने मरहूम शमशाद चच्चा के यहाँ बाबा (ताजिया) के आने पर लोहबान और बताशा मुझसे ही भेजती थी । कहती थी तुम अपने माँ बाप की शादी के 10 साल बाद पैदा हुए । सरयू में डुबकी मारी और बोली एक नाती दे दो तुम्हारा ही नाम रखूंगी और ताजिया बाबा को उसी साल सिन्नी और लोबान भेजी ....10th में था दादी चली गई अन्यथा आज के  माहौल में पुछता जरूर दादी सरयू माँ ने दिया था मुझे कि हसन हुसैन से ....क्यों 1988 में इस प्रश्न का औचित्य ही नही था । प्रासंगिक तो अब ह...

सत्याग्रह/पत्थरबाजी

सत्यगृह....         मैं मुस्लिम भाईयों से कुछ गुजारिश करना चाहता हूँ .... हालांकि यह जनता हूँ कि इस मुद्दे पर बात करना स्वयं को विवादित बनाना ही होगा , क्योंकि दोनों तरफ चश्मा लगा है । आपने भी लगा रखा है और हमने भी लगा ही रखा है । या यूं कहें कि पूरे समाज ने ही लगा रखा है । समय, स्थान और जरूरतों के हिसाब से हम परिभाषा,नियमों में तब्दीली चाहते है और कर ही लेते है । इसमें कोई संदेह नही की यह मुल्क आपका नहीं है । किसने क्या किया, कैसे किया, कब किया ...अभी इसमें नही पड़ते पर हुवा जो भी जैसे भी हुवा, उनकी संतति, संताने उसमे न तो दोषी होती है और न ही उनके गुनाहों की हकदार है ।         कल हम कांग्रेसियों ने आंदोलन किया आप सबने, पुलिस प्रशासन, सरकार ने देखा ...25 स्थानों पर यह आन्दोलन हुवा ....लखनऊ और दिल्ली का तो आप सबने देखा ही होगा । क्या कोई हताहत हुवा ? क्या हमने पुलिस से कोई बर्बरता की ? क्या हमने भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यकर्ता से कोई अभद्रता की ? ....ऐसा कुछ न करते हुए भी हमने अपनी पार्टी का अपने नेता राहुल गांधी का इकबाल बुलंद किया । सरकार स...