आपदा में खुशियों का अवसर .... इस शब्द से तो आप परिचित ही होंगे "आपदा में अवसर" ...कोई नही चूका अवसर लेने में, यहाँ तक जिसने इस शब्द का ईजाद किया वो भी नही.... ठोकनी,पान मसाला से सब्जी और जीवन उपयोगी सभी वस्तुएं महंगी हुई । किसने किया ? कम हो गयी थी क्या चीजे ? अवसर का आनंद सभी ले लिया....शमशान पर लकड़ी भी महंगी हुई और कफन का कपड़ा भी ...... एक नई चीज आयी ऑक्सीजन ....सभी जानते है फेफड़े पर यदि कोई दिक्कत आएगा तो आवश्यकता ऑक्सीजन की ही पड़ेगी । आपको पता है कॅरोना की पहली लहर आने के बाद भी पिछले वर्ष ऑक्सीजन का निर्यात 700 प्रतिशत बढ़ा दिया गया । रिफलिंग जहॉ 500 रुपये में होती थी उसे 2000 निर्धारित किया गया ....अन्य देशों की जनता की आवश्यकता को हमारे यशस्वी ने महसूस किया ...अपनी तो जी लेगी, लोग है ना तर्क देने वाले, उनकी महत्ता और अनिवार्यता बताने वाले ...एक और बात मई जून 2000 में जब अन्य देश वैक्सीन का आर्डर कर रहे थे तब हमसे थाली और ताली बजवाया जा रहा था ...खैर मैं भी कहाँ भटक गया , लिखने क्या जा रहा था और लिखने क्या लगा ....सरकार समर्थक आगे पढेंगे ही नही मेर...
सचिव, उत्तर प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी